भारत की मेडल संभावनाएं: ग्लासगो 2026 से अहमदाबाद 2030 तक। कम मेडल का मतलब कमज़ोर प्रदर्शन नहीं है; असली तस्वीर कुछ और है...!!!
जुलाई 23 से ग्लासगो में शुरू हो रहे 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर भारतीय फैंस में उत्साह तो है, लेकिन इस बार की कहानी थोड़ी अलग है। यह गेम्स पिछले कई एडिशनों की तुलना में काफ़ी छोटे हैं। सिर्फ़ 10 खेल, चार वेन्यू, और एक कॉम्पैक्ट शेड्यूल। ऑस्ट्रेलिया के राज्य विक्टोरिया के मेज़बानी से हटने के बाद स्कॉटलैंड ने यह ज़िम्मेदारी उठाई, और बजट की मजबूरियों में एक "लीन" गेम्स तैयार हुए।
लेकिन भारतीय फैंस और मीडिया के लिए असली सवाल यह नहीं है कि ग्लासगो में भारत कितने मेडल जीतेगा। असली सवाल यह है - इन मेडल्स की संख्या से हम 2030 में अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के बारे में क्या अंदाज़ा लगा सकते हैं? और जवाब है: बहुत कम।
ग्लासगो 2026 के 10-खेलों वाले प्रोग्राम में एथलेटिक्स, स्विमिंग, 3x3 बास्केटबॉल, ट्रैक साइक्लिंग, वेटलिफ्टिंग, लॉन बॉल्स, आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स, नेटबॉल, बॉक्सिंग और जूडो शामिल हैं। लेकिन इस लिस्ट से रेसलिंग, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और क्रिकेट गायब हैं।
यह कोई मामूली कटौती नहीं है। बर्मिंघम 2022 में भारत ने कुल 61 मेडल जीते थे और इनमें से करीब आधे मेडल्स उन्हीं खेलों से आए थे, जो अब ग्लासगो के प्रोग्राम से हटा दिए गए हैं। रेसलिंग भारत के लिए पारंपरिक रूप से सबसे मजबूत मेडल स्रोतों में से एक रहा है। बैडमिंटन और टेबल टेनिस में भी भारत का दबदबा रहा है। हॉकी में भारतीय टीमें अक्सर पोडियम पर पहुंचती रही हैं।
नतीजतन ग्लासगो 2026 का भारत का मेडल टैली, बर्मिंघम या गोल्ड कोस्ट की तुलना में structurally छोटा दिखेगा, लेकिन यह भारत के खेल प्रदर्शन में गिरावट का संकेत नहीं है। यह सिर्फ़ इस बात का संकेत है कि मौका ही कम है।
बचे हुए 10 खेलों में भी भारत के पास खासकर तीन क्षेत्रों में ठोस मेडल संभावनाएं हैं:
वेटलिफ्टिंग: भारत का सबसे भरोसेमंद मेडल स्रोत रहा है। मीराबाई चानू, दो बार की चैंपियन, महिलाओं के 48kg वर्ग में भारतीय दस्ते की अगुवाई करेंगी। बिंद्यारानी देवी, हरजिंदर कौर और लवप्रीत सिंह जैसे अनुभवी नाम भी टीम में हैं। वेटलिफ्टिंग कॉम्पिटिशन 26 से 30 जुलाई तक SEC आर्माडिलो में होंगे और भारत ने गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 दोनों में इस खेल में मेडल टैली टॉप की थी।
एथलेटिक्स: नीरज चोपड़ा की अगुवाई में 32 सदस्यीय दस्ता (22 पुरुष, 10 महिलाएं) मैदान में उतरेगा। नीरज चोपड़ा ने दोहा डायमंड लीग 2026 में 85.69m के थ्रो के साथ, 82.61m का क्वालिफिकेशन मार्क आसानी से पार कर लिया है, जिससे उनकी ग्लासगो यात्रा अब पूरी तरह पक्की हो गई है। इसके अलावा प्रवीण चित्रावेल (ट्रिपल जंप) और रोहित यादव (जेवलिन) जैसे युवा एथलीट भी फॉर्म में हैं जो पोडियम फिनिश की उम्मीद रखते हैं।
बॉक्सिंग: ओलंपिक मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन भारतीय बॉक्सिंग दस्ते की अगुवाई करेंगी। प्रीति पवार भी एक बड़ा नाम हैं, जिनके नाम एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 में गोल्ड और तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन के खिलाफ़ जीत दर्ज है।
यहीं पर असली कहानी शुरू होती है। अहमदाबाद 2030 का प्रोग्राम ग्लासगो जितना छोटा नहीं होगा। मेज़बान देश होने के नाते भारत को स्पोर्ट्स प्रोग्राम में काफ़ी बड़ी भूमिका निभानी है। पहले से 8 खेल कन्फर्म हैं, और 15 अन्य खेल विचाराधीन हैं। इसके अलावा क्रिकेट और हॉकी के भी शामिल होने की उम्मीद है, हालांकि अभी CGF से इनका औपचारिक अनुमोदन बाकी है। साथ ही, कबड्डी, खो-खो, मल्लखंब और योग (प्रतिस्पर्धी) - इन चार भारतीय खेलों में से दो को "होस्ट्स चॉइस" स्लॉट के तहत शामिल किए जाने की संभावना है।
इसका मतलब है कि 2030 में भारत के पास बिल्कुल वही अवसर वापस आ जाएंगे जो ग्लासगो में छूट गए हैं : रेसलिंग, बैडमिंटन, टेबल टेनिस जैसे खेलों में मेडल जीतने का मौका, साथ ही भारतीय पारंपरिक खेलों में घरेलू मेज़बानी का सीधा फायदा।
तो ग्लासगो के मेडल टैली को अहमदाबाद के लिए "बेंचमार्क" मानना एक भूल होगी। यह ज़्यादा सटीक होगा अगर हम इसे इस तरह देखें:
वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स और बॉक्सिंग में भारत का प्रदर्शन : यह बताएगा कि भारत के कोर मेडल-प्रोड्यूसिंग खेल कितने मज़बूत बने हुए हैं, चाहे प्रोग्राम कुछ भी हो।
युवा एथलीटों का उभार (जैसे प्रवीण चित्रावेल, रोहित यादव, प्रीति पवार) : यह दिखाएगा कि 2030 तक भारत के पास कैसा टैलेंट पूल तैयार होगा।
मेडल-प्रति-इवेंट अनुपात : कुल मेडल संख्या से ज़्यादा महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि जिन खेलों में भारत प्रतिस्पर्धा कर रहा है, उनमें उसकी सफलता दर कैसी है।
ग्लासगो 2026 में भारत का मेडल टैली स्वाभाविक रूप से बर्मिंघम 2022 से छोटा दिखेगा, लेकिन इसे भारतीय खेलों में गिरावट के तौर पर नहीं पढ़ा जाना चाहिए। यह सिर्फ़ एक संकुचित प्रोग्राम का नतीजा है, जिसमें भारत की कुछ सबसे मजबूत मेडल-खदानें , रेसलिंग, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी , शामिल ही नहीं हैं।
असली परीक्षा और असली मौका 2030 में अहमदाबाद में होगा, जहां भारत न सिर्फ़ इन खेलों में वापसी करेगा, बल्कि मेज़बान देश के तौर पर अपने पारंपरिक खेलों को भी वैश्विक मंच पर पेश करने का मौका पाएगा। ग्लासगो को अहमदाबाद की तैयारी की एक झलक के तौर पर देखा जाना चाहिए न कि फाइनल स्कोरकार्ड के तौर पर।
Sources:
Sportstar - The Hindu: Mirabai Chanu leads Indian weightlifting squad for Glasgow Commonwealth Games
Olympics.com: All Indian athletes qualified for Commonwealth Games 2026
Olympics.com: Doha Diamond League 2026: Neeraj Chopra finishes fourth; qualifies for Commonwealth Games
The Tribune: Mirabai Chanu headlines India’s weightlifting squad
Business Standard: CWG 2026: Neeraj Chopra named in athletics squad
ANI News: Mirabai Chanu ruled out of Asian Weightlifting Championships
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